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गन्ना लेना ही नही था तो सर्वे क्यो कराये

0 भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना का मामला
कवर्धा – कारखाना द्वारा औसत से अधिक गन्ना रकबा का सर्वे कराया गया जब आपको उतना गन्ना लेना ही नही है तो इस सर्वे का औचित्य ही क्या है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना मे गन्ना उत्पादक किसान बेहाल हो रहे है किसानो को समय पर गन्ना आपूर्ति पर्ची नही मिल रहा,गन्ना का सर्वे मे अनियमितता एवं कारखाना की पेराई क्षमता औसत से कम होना। प्राप्त जानकारी के अनुसार कारखाना द्वारा क्षेत्र किसानो का सर्वे रकबा अधिक का किया गया है लेकिन गन्ना उत्पादक के 2 एकड़ का गन्ना कारखाना द्वारा खरीदा जा रहा है जबकि ऐसा नही होना चाहिए। कारखाना के द्वारा कराये गये सर्वे के अनुसार गन्ना नही खरीदा जा रहा है। कारखाना द्वारा कई बड़े किसानो का सर्वे 10 एकड़ मे किया गया किंतु कारखाना द्वारा इन किसानो का गन्ना सर्वे अनुसार नही लिया जा रहा है।
जानकारी अनुसार भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के पास कुल 12741 शेयरधारी किसान है। क्षेत्र के 292 गांव मे गन्ना का कुल रकबा 28 हजार 459 एकड़ है यदि सर्वे को गौर से देखा जाये तो 8 लाख 53 हजार 770 मे टन गन्ना का सर्वे हुआ था जिसमे से पेराई के अंतिम तक लगभग 4 लाख मे. टन गन्ना की खरीदी की जा सकती है अब सवाल यह है कि बाकि का गन्ना जो कारखाना द्वारा किसानो का लगभग साढ़े चार लाख मे.टन गन्ना सर्वे कराया गया था उसका क्या होगा। कारखाना प्रबंधन को चाहिए कि आवश्यकता से अधिक गन्ने का सर्वे न कराये अपितु जितना जरुरत है उतना ही कराये।
कारखाना व किसान के बीच अनुबंध हो – किसानो को उम्मीद रहती है कि जब कारखाना उसके गन्ने का सर्वे करा रही है तो जरुर खरीदेगी लेकिन ऐसा नही हो रहा है। कारखाना व किसान अपनी गलती को एक दूसरे के उपर मढ़ते है जिसके कारण सही दिशा नही मिल पाता गन्ना आपूर्ति पर्ची व सर्वे करते समय दोनो के बीच एक अनुबंध हो जिसमे लिखा जाना चाहिए कि किसान की उपज को कारखाना खरीदे एवं किसान समय पर अपनी उपज को कारखाना को दे।

 

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