धमतरी एक ऐसा शहर जिसकी पहचान सिर्फ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों से नहीं, बल्कि अपनी जीवंतता और मेहनतकश जनता से भी है। आज यह शहर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ राजनीति से ऊपर उठकर विकास की नई परिभाषा गढ़ने की आवश्यकता है।
बीते वर्षों में हमने देखा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार ने कई बार विकास कार्यों की रफ़्तार को धीमा किया। सड़कों से लेकर सफाई व्यवस्था, जल आपूर्ति से लेकर बुनियादी ढाँचे तक—हर विषय पर राजनीति हावी रही। सवाल यह है कि कब तक धमतरी की जनता दलगत खींचतान की कीमत चुकाती रहेगी?
आज ज़रूरत है एक ऐसी सोच की, जिसमें धमतरी विकास पहले, राजनीति बाद में रखा जाए। यही वह सोच है जो शहर की तकदीर बदल सकती है।
महापौर रामू रोहरा लगातार यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वे योजनाओं का पैसा लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, चाहे राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार। उनकी पहल से कई परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिससे आने वाले समय में धमतरी की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।
लेकिन सवाल सिर्फ महापौर के प्रयासों तक सीमित नहीं है। विपक्ष की भी यह जिम्मेदारी है कि वह केवल आलोचना तक सीमित न रहे, बल्कि सहयोग की भूमिका निभाए। राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन शहर का हित सर्वोपरि होना चाहिए। अगर सभी दल—मिलकर एक साथ कदम बढ़ाएँ, तो धमतरी प्रदेश का आदर्श शहर बन सकता है।
धमतरी की जनता भी अब यही चाहती है। उन्हें न नारों से फर्क पड़ता है और न ही मंचों से दिए गए भाषणों से। उन्हें चाहिए साफ सड़कें, बेहतर जल आपूर्ति, आधुनिक शिक्षा, रोज़गार के अवसर और सुरक्षित वातावरण। यही असली मुद्दे हैं, और यही नेताओं का पहला दायित्व होना चाहिए।
संपादक की कलम से यही संदेश है कि—
👉 राजनीति से ऊपर उठकर धमतरी के भविष्य की बात की जाए।
👉 आरोप-प्रत्यारोप की जगह सहयोग को प्राथमिकता दी जाए।
👉 दलों की ताकत शहर के विकास में झलके, न कि टकराव में।
धमतरी का सपना तभी साकार होगा जब नेता और जनता दोनों यह ठान लें कि यह शहर सिर्फ उनका नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का है। इसलिए आज का संकल्प यही होना चाहिए—
“धमतरी का विकास ही असली राजनीति है।”