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मल्टीनेशनल कंपनी के हाइब्रिड एवं रिसर्च धान बीजों की कीमतों पर मूल्य नियंत्रण अधिनियम लागू करने की मांग

भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव किसानों पर टिकी हुई है। वर्तमान समय में देश के विभिन्न राज्यों में निजी कंपनियों द्वारा हाइब्रिड धान बीज एवं अनुसंधान आधारित धान बीज बड़े पैमाने पर बेचे जा रहे हैं। इन बीजों के पैकेट पर कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) प्रिंट करवा रही हैं, जिसके कारण किसानों को अत्यधिक महंगे दामों पर बीज खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

आज खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। खाद, कीटनाशक, डीजल, बिजली एवं मजदूरी के बढ़ते खर्च के कारण किसान आर्थिक दबाव में हैं। ऐसे में बीज कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से निर्धारित की गई कीमतें किसानों की समस्या को और गंभीर बना रही हैं।

कई स्थानों पर यह भी देखा गया है कि एक ही प्रकार के धान बीज अलग-अलग जिलों और राज्यों में अलग-अलग कीमतों पर बेचे जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि बीज कंपनियों द्वारा मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता का अभाव है और किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए हाइब्रिड एवं अन्य धान बीजों की कीमतों पर सरकार द्वारा नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए तथा इस दिशा में प्रभावी नीति बनाई जाए। इस मुद्दे को उठाते हुए जिले के पत्रकार आशीष कुमार अग्रवाल ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर कंपनी एवं बीजों पर सरकारी नियंत्रण लागू करने की मांग की ।

किसानों के हित में निम्नलिखित मांगों पर विचार किया जाना आवश्यक है:

*देश में बिकने वाले सभी मल्टीनेशनल कंपनियों के हाइब्रिड एवं अनुसंधान धान बीजों पर सरकारी मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाए।
*बीज कंपनियों द्वारा पैकेट पर प्रिंट किए जाने वाले MRP को सरकार की अनुमति से ही तय किया जाए।
*सभी धान बीजों के लिए अधिकतम कीमत (Maximum Price Limit) सरकार द्वारा निर्धारित की जाए।
*बीज कंपनियों द्वारा अधिक मूल्य वसूली करने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाए।

यदि सरकार इस विषय पर ठोस नीति बनाती है तो इससे देश के करोड़ों किसानों को राहत मिलेगी तथा कृषि क्षेत्र को भी मजबूती प्राप्त होगी।

भारत में मल्टीनेशनल सीड्स कंपनी का हाईब्रिड धान, रिसर्च धान बीज के रेट सबसे अधिक होते है जिससे कि दूसरी कंपनी की तुलना मे अधिक रेट में किसानो को धान बीज खरीदना पड़ता है ।

भारत मे कई लोकल कंपनी का धान,गेहूं, सोयाबीन बीज बिकने के कारण किसानों को सही बीज नहीं मिल पा रहा है बीज सही नहीं मिलने से किसानों की फसल खराब हो जाती है और किसान बहुत परेशान हो जाता है ऐसे लोकल बीज के ऊपर कृषि विभाग को उचित कार्रवाई करना चाहिए। और धान बीज का सैम्पल लेकर संबंधित लेबोरेट्री में टेस्ट होना चाहिए। उसके बाद किसानो को बीज बेचने का पर्मिशन देना चाहिए।

संपादक – छत्तीसगढ़ जनमंच न्यूज
कवर्धा, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़)

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