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कवर्धा दिल्ली पब्लिक स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भुवनेश्वर के तत्वावधान में “आर्ट इंटीग्रेशन पर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (Capacity Building Program)” का सफल आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया।

दिनांक 24 जुलाई 2025 को दिल्ली पब्लिक स्कूल, महाराजपुर, कवर्धा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भुवनेश्वर के तत्वावधान में “आर्ट इंटीग्रेशन पर क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (Capacity Building Program)” का सफल आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रातः 9:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक चला, जिसमें विद्यालय के शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना था कि किस प्रकार कला (Art) को प्रत्येक विषय में एकीकृत कर शिक्षा को अधिक प्रभावशाली, आनंददायक, व्यवहारिक और छात्र-केंद्रित बनाया जा सकता है। जब पढ़ाई को वास्तविक जीवन की स्थितियों से जोड़ा जाता है और उसमें रचनात्मकता एवं अभिव्यक्ति के माध्यम जोड़े जाते हैं, तब विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ती है और सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) भी उल्लेखनीय रूप से बेहतर होते हैं। इस अवसर पर CBSE द्वारा नामित दो अनुभवी Resource Persons – आलोक कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य, अरिहंत एकेडमी, बालोद (छत्तीसगढ़) एवं श्री शुभांक सिंह ठाकुर, अकादमिक डीन, नारायणा ई-टेक्नो स्कूल, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) – ने प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। दोनों विशेषज्ञों ने अपने अनुभव के आधार पर शिक्षकों को विषयवस्तु में कला के समावेश की विविध विधियाँ समझाईं। उन्होंने बताया कि गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं में भी कला का सहज और प्रभावी समावेश किया जा सकता है। उनके द्वारा गतिविधियों, समूह कार्य, चित्रात्मक प्रस्तुति, नाट्य रूपांतरण और रचनात्मक लेखन जैसी विधियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया गया। शिक्षकों को नवाचारी शिक्षण तकनीकों, वैकल्पिक मूल्यांकन, और विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्षमता के विकास पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम के सभी सत्रों में शिक्षकों की सहभागिता अत्यंत सक्रिय और सराहनीय रही। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और व्यावहारिक रूप से उपयोगी बताया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती ग्रेशिया एन्न, फीग्रेड, ने CBSE के प्रति आभार प्रकट करते हुए दोनों Resource Persons और उपस्थित शिक्षकों की सराहना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा – “कला के माध्यम से हम शिक्षा को केवल मनोरंजक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण भी बना सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में सोचने की स्वतंत्रता, रचनात्मकता, और सामाजिक समझ का विकास होता है।” विद्यालय प्रबंधन ने भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारपूर्ण एवं प्रभावशाली प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की इच्छा प्रकट की और शिक्षकों को निरंतर सीखने हेतु प्रेरित किया।



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