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छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोक खेल के साथ जिले में ‘छत्तीसगढ़िया ओलंपिक’ का हुआ आगाज

शहर से लेकर गांव तक महिला, पुरूष, बुजुर्ग और बच्चे ने भाग लेकर पारंपरिक लोक खेल को दी नई पहचान 
कलेक्टर ने पटेल मैदान में आयोजित राजीव युवा मितान क्लब स्तर पर ‘छत्तीसगढ़िया ओलंपिक ’ का शुभारंभ किया
कवर्धा,  6 अक्टूबर 2022। छत्तीसगढ़ी पारंपरिक लोक खेल गिल्ली डंडा, पिट्टूल, लंगड़ी दौड़, बांटी (कंचा), बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा सहित 14 तरह के खेल के साथ आज जिले में ‘छत्तीसगढ़िया ओलंपिक’ का शुभारंभ हुआ। जिले में शहर से लेकर गांव तक महिला, पुरूष, बुजुर्ग सहित बच्चों ने इस पारंपरिक लोक खेल में भाग लिया। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री श्री भूपेश ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की आज शुरूआत की। छत्तीसगढ़ की संस्कृति व सभ्यता और विशिष्ट पहचान यहां की ग्रामीण परंपराओं और रीति रीवाजों से है। इसमें पारंपरिक खेलों का विशेष महत्व है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के इन खेलों को लोग भूलते जा रहे थे। खेलों को चिरस्थायी रखने, आने वाली पीढ़ी से इनको अवगत कराने के लिए छत्तीसगढ़ियां ओलंपिक खेलों की शुरूआत की गई है।
इसी परिपेक्ष्य में कलेक्टर जनमेजय महोबे ने पटेल मैदान में आयोजित राजीव युवा मितान क्लब स्तर पर ‘छत्तीसगढ़िया ओलंपिक ’ का शुभारंभ किया। इस दौरान कलेक्टर सहित जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संघ, राजीव युवा मितान क्लब ने गिल्ली डंडा खेल और समूह की महिलाओं ने फुगड़ी रस्सा कसी खेल में हिस्सा लिया। कलेक्टर महोबे ने संबोधित करते हुए कहा कि परंपरागत रूप से बहुत समय से खेलते आ रहे खेल को शासन द्वारा वैश्विक पहचान दिलाया जा रहा है। हम सभी को इसमें अधिक से अधिक हिस्सा लेना चाहिए। यहां के सभी लोग इस कार्यक्रम के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस खेल को खेल तक न रखते हुए हमारी संस्कृति को आत्मसात करने का साधन बनाएं और आगे बढ़े। छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति, लोक परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसे आगे बढ़ाया गया है, उसी प्रकार हमारी खेल संस्कृति को भी बहुत आगे तक ले जाना है। इससे ना केवल हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहेगा बल्कि हमारा रुझान अपनी संस्कृति और खेल के प्रति बढ़ेगा। नगर पालिका अध्यक्ष ऋषि शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप छत्तीसगढ़ी परंपरा का निर्माण बहुत अच्छे ढंग से करना है। इसी परिपेक्ष में आज छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का शुभारंभ पूरे प्रदेश में एक साथ किया गया। छत्तीसगढ़ी खेल हम बचपन से खेलते आ रहे हैं। इन खेलों को हम भूल गए थे, इसे हमारे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुनर्जीवित किया और हमें लोक परंपरा और छत्तीसगढ़ी खेल की तरफ जोड़ने का प्रयास किया और इससे हम फिर से जुड़ने जा रहे हैं। राजीव युवा क्लब के माध्यम से छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को पूर्ण करने जा रहे हैं जिसके माध्यम से अपनी संस्कृति और छत्तीसगढ़िया परंपरा, अपनी पहचान को परिलक्षित कर सकेंगे। इस दौरान पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, नगर पालिका उपाध्यक्ष जमील खान, नगर पालिका सीएमओ नरेंद्र वर्मा, पार्षद अशोक सिंह, जिला खेल अधिकारी आरती पाण्डेय सहित अन्य पदाधिकारी, पार्षद, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।
जिले में गांव से लेकर शहर तक ’छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक’ का हुआ आयोजन 
जिले में गांव से लेकर शहर तक ’छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक’ का आयोजन किया गया। जिसमे महिला, पुरूष, बुजुर्ग सहित बच्चों ने इस पारंपरिक लोक खेल में भाग लिया। ’छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक’ गांव से लेकर राज्य स्तर तक आज 6 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 6 जनवरी 2023 तक चलेगा।
दो श्रेणी में 14 तरह के खेले होंगे
 छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेल प्रतियोगिता दलीय एवं एकल श्रेणी में होगी। छत्तीसगढ़ ओलम्पिक 2022-23 में 14 प्रकार के पारम्परिक खेलों को शामिल किया गया है। इसमें दलीय श्रेणी गिल्ली डंडा, पिट्टूल, संखली, लंगड़ी दौड़, कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी और बांटी (कंचा) जैसे खेल शामिल किए गए हैं। वहीं एकल श्रेणी की खेल विधा में बिल्लस, फुगड़ी, गेड़ी दौड़, भंवरा, 100 मीटर दौड़ और लम्बी कूद शामिल है।
गांव के क्लब से लेकर राज्य तक छह स्तरों पर आयोजन
छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक में छह स्तर निर्धारित किए गए हैं। इन स्तरों के अनुसार ही खेल प्रतियोगिता के चरण होंगे। इसमें गांव में सबसे पहला स्तर राजीव युवा मितान क्लब का होगा। वहीं दूसरा स्तर जोन है, जिसमें 8 राजीव युवा मितान क्लब को मिलाकर एक क्लब होगा। फिर विकासखंड/नगरीय क्लस्टर स्तर, जिला, संभाग और अंतिम में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक में आयु वर्ग को तीन वर्गो में बांटा गया है। इसमें प्रथम वर्ग 18 वर्ष की आयु तक फिर 18-40 वर्ष आयु सीमा तक, वहीं तीसरा वर्ग 40 वर्ष से अधिक उम्र के लिए है।
छत्तीसगढ़ के ये पारम्परिक खेल न केवल ऋतुओं पर आधारित होते है, बल्कि कई बार अपने साथ-साथ लोकसंगीत और लोकगायन को भी लिए होते हैं, जिसके कारण ये खेल अपार रोचकता के साथ तेज गति, तेज दृष्टि, संतुलन, स्फूर्ति को बढ़ाते हुए शारीरिक और मानसिक मनोरंजन देते हैं। ये खेल इतने अधिक रोचक होते हैं कि गांवों के बच्चे अपने सारे सुख-दुख, गम शिकवे भूल कर इन खेलों के अभूतपूर्व आनंद की अनुभूति लेते हैं। तेजी से लुप्त होते जा रहे ऐसे खेल और बच्चों की मासूमियत एक बार फिर से लोक खेलों के माध्यम से वापस लौटाई जा सकती है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए ’छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक’ की शुरूआत की गई है, इससे खेलों के प्रति एक उत्साह का वातावरण बनेगा और बच्चे एक बार फिर से खेलों के मैदान में दिखाई देंगे।
उल्लेखनीय है कि उत्साह, आनंद और सृजनशीलता का पर्याय होते हैं लोक खेल। स्थानीय सामाग्रियों की आसानी से उपलब्धता, खेल के स्थानीय तौर तरीके, रोचकता और मनोरंजन जैसे गुणों के कारण लोक खेल जन-जन में बेहद लोकप्रिय होते हैं। एक ऐसे समय जब बच्चों, किशोरों और युवाओं सहित नागरिकों की सारी दुनिया सिमटकर मोबाइल में समाते जा रही है और उनका बचपन का नैसर्गिक उत्साह, मुस्कान और सृजनशीलता का दायरा भी छोटा होता जा रहा है। ऐसे में उनकी दुनिया और खेल के मैदान को एक बार फिर से व्यापक बनाने की आवश्यकता सभी ओर महसूस की जा रही है। निश्चय ही लोक खेल इस दिशा में एक सार्थक कदम बन सकता है। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जो लोककला, लोक संस्कृति और लोक खान-पान को लगातार बढ़ावा दे रही है, अब इसी दिशा में एक कदम और आगे बढ़कर लोक खेलों पर आधारित ’छत्तीसगढिया ओलम्पिक’ का आयोजन कर रही है।
 

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